CGPSC/VYAPAM NOTES 2026 | SAMANYA GYAN

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भारतीय संविधान के मुख्य संवैधानिक प्रावधान (Salient Features of the Constitution)

भारतीय संविधान अपने आप में अद्वितीय है। यद्यपि इसे दुनिया के कई संविधानों से उधार लिया गया है, फिर भी इसमें ऐसे कई प्रावधान हैं जो इसे अन्य देशों के संविधानों से अलग बनाते हैं।

1. सबसे लंबा लिखित संविधान (Lengthiest Written Constitution)

भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है।

  • मूल संविधान (1949): इसमें एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद (22 भागों में विभाजित) और 8 अनुसूचियां थीं।
  • वर्तमान स्थिति: इसमें प्रस्तावना, लगभग 470+ अनुच्छेद (25 भागों में विभाजित) और 12 अनुसूचियां हैं।
  • विस्तृत होने के कारण: भारत का भौगोलिक विस्तार, विविधता, और केंद्र व राज्यों के लिए एक ही संविधान का होना।

2. विभिन्न स्रोतों से विहित (Drawn from Various Sources)

संविधान के प्रावधान कई देशों से लिए गए हैं, जिसे डॉ. अम्बेडकर ने “विश्व के सभी ज्ञात संविधानों को छानने के बाद” बनाया बताया था।

  • भारत शासन अधिनियम 1935: इसका सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 250 अनुच्छेद) इसी से लिया गया है (जैसे- संघीय तंत्र, राज्यपाल का कार्यालय, न्यायपालिका)।
  • ब्रिटेन: संसदीय शासन, विधि का शासन, एकल नागरिकता।
  • अमेरिका: मौलिक अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक पुनर्विलोकन, राष्ट्रपति पर महाभियोग।
  • आयरलैंड: राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (DPSP)।
  • कनाडा: सशक्त केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था।
  • ऑस्ट्रेलिया: समवर्ती सूची, संसद की संयुक्त बैठक।
  • जर्मनी (Weimar): आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन।
  • सोवियत संघ (रूस): मौलिक कर्तव्य।

3. नम्यता और अनम्यता का समन्वय (Blend of Rigidity and Flexibility)

संविधान को संशोधन की प्रक्रिया के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। भारत का संविधान न तो अमेरिका की तरह कठोर है और न ही ब्रिटेन की तरह लचीला।

  • कठोर (Rigid): कुछ प्रावधानों को संशोधित करने के लिए संसद के विशेष बहुमत और आधे राज्यों की विधानसभाओं के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है (जैसे- राष्ट्रपति का चुनाव, GST)।
  • लचीला (Flexible): कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से बदले जा सकते हैं (जैसे- नए राज्यों का निर्माण)।
  • अनुच्छेद 368: यह संविधान संशोधन की शक्ति संसद को देता है।

4. एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था (Federal System with Unitary Bias)

भारत का संविधान ‘संघीय’ सरकार की स्थापना करता है, लेकिन इसका झुकाव ‘एकात्मक’ (Unitary) है।

  • संघीय लक्षण: दो सरकारें (केंद्र और राज्य), शक्तियों का विभाजन, लिखित संविधान, संविधान की सर्वोच्चता।
  • एकात्मक लक्षण: सशक्त केंद्र, एकल संविधान, एकल नागरिकता, राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा, अखिल भारतीय सेवाएं (IAS/IPS)।
  • नोट: संविधान में कहीं भी ‘संघ’ (Federation) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। अनुच्छेद 1 भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहता है।

5. सरकार का संसदीय स्वरूप (Parliamentary Form of Government)

भारतीय संविधान ने अमेरिकी ‘अध्यक्षीय प्रणाली’ के बजाय ब्रिटिश ‘संसदीय प्रणाली’ को अपनाया है। यह विधायिका और कार्यपालिका के बीच सहयोग पर आधारित है।

  • विशेषताएं:
    • वास्तविक (PM) और नाममात्र (राष्ट्रपति) कार्यपालिका की उपस्थिति।
    • बहुमत प्राप्त दल का शासन।
    • विधायिका के प्रति कार्यपालिका की सामूहिक जिम्मेदारी (अनुच्छेद 75)।
    • प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का नेतृत्व।

6. संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चता का समन्वय

  • संसदीय संप्रभुता (ब्रिटेन से): संसद किसी भी कानून को बना सकती है या बदल सकती है।
  • न्यायिक सर्वोच्चता (अमेरिका से): सुप्रीम कोर्ट अपनी ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) की शक्ति के माध्यम से संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है (यदि वह संविधान का उल्लंघन करता है)।

7. एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका (Integrated and Independent Judiciary)

  • एकीकृत: भारत में न्यायपालिका का ढांचा पिरामिड जैसा है। सबसे ऊपर सुप्रीम कोर्ट, उसके नीचे हाई कोर्ट और फिर अधीनस्थ न्यायालय। (अमेरिका में केंद्र और राज्य की अलग न्यायपालिका होती है, भारत में ऐसा नहीं है)।
  • स्वतंत्र: जजों की नियुक्ति, वेतन और कार्यकाल सुरक्षित होते हैं ताकि वे बिना किसी दबाव के कार्य कर सकें।

8. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) – भाग III

संविधान नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार प्रदान करता है (अनुच्छेद 12-35)।

  1. समता का अधिकार (अनु. 14-18)
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनु. 19-22)
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनु. 23-24)
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनु. 25-28)
  5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनु. 29-30)
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनु. 32)
  • ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, यानी इनके उल्लंघन पर आप सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

9. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles – DPSP) – भाग IV

  • उद्देश्य: भारत को एक ‘कल्याणकारी राज्य’ बनाना।
  • ये अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं।
  • ये गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं (इनके लागू न होने पर आप कोर्ट नहीं जा सकते)।

10. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) – भाग IV(A)

  • मूल संविधान में ये नहीं थे। इन्हें 42वें संशोधन (1976) द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद 51(A) के तहत प्रत्येक नागरिक के 11 कर्तव्य हैं (जैसे- संविधान का पालन करना, राष्ट्रगान का आदर करना, पर्यावरण की रक्षा करना)।

11. धर्मनिरपेक्ष राज्य (Secular State)

भारत का अपना कोई ‘धर्म’ नहीं है।

  • 42वें संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में ‘पंथनिरपेक्ष’ (Secular) शब्द जोड़ा गया।
  • राज्य सभी धर्मों की समान रक्षा करता है और किसी भी धर्म को विशेष दर्जा नहीं देता।

12. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)

  • प्रत्येक नागरिक जो 18 वर्ष (पहले 21 वर्ष थी, 1989 में 61वें संशोधन द्वारा घटाई गई) से ऊपर है, उसे धर्म, जाति, लिंग या साक्षरता के भेदभाव के बिना वोट देने का अधिकार है।

13. एकल नागरिकता (Single Citizenship)

अमेरिका में दोहरी नागरिकता होती है (देश की और राज्य की), लेकिन भारत में केवल एकल नागरिकता है। कोई भी व्यक्ति केवल ‘भारतीय’ होता है, किसी राज्य (जैसे बिहार या म.प्र.) का नागरिक नहीं।

14. स्वतंत्र निकाय (Independent Bodies)

सरकार के अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) के अलावा, संविधान कुछ स्वतंत्र संस्थाओं की स्थापना करता है:

  • चुनाव आयोग: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए।
  • CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक): सरकारी खातों की ऑडिटिंग के लिए।
  • UPSC/SPSC: सरकारी अधिकारियों की भर्ती के लिए।

15. आपातकालीन प्रावधान (Emergency Provisions)

देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए राष्ट्रपति को तीन प्रकार के आपातकाल लगाने की शक्ति है:

  1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनु. 352): युद्ध या सशस्त्र विद्रोह के समय।
  2. राज्य आपातकाल / राष्ट्रपति शासन (अनु. 356): राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर।
  3. वित्तीय आपातकाल (अनु. 360): वित्तीय स्थिरता को खतरा होने पर।

16. त्रि-स्तरीय सरकार (Three-tier Government)

मूल रूप से संविधान में दो स्तर (केंद्र और राज्य) थे।

  • 73वें और 74वें संशोधन (1992) ने सरकार का तीसरा स्तर (स्थानीय सरकार) जोड़ा:
    • पंचायती राज (ग्रामीण) – अनुसूची 11
    • नगर पालिका (शहरी) – अनुसूची 12
  • यह विशेषता दुनिया के अन्य किसी प्रमुख संविधान में नहीं पाई जाती।

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Manish Pandey
Manish Pandey

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